SUBHADRA KUMARI CHOUHAN's POEM
Speaking at a memorial meeting
गिर गिर कर उठना सीखा। उठ उठ कर चलना सीखा। चल चल कर दौड़ना सीखा। सुन सुन कर बोलना सिखा। रो रो कर हंसना सीखा। मर मर कर जीना सीखा। जीकर फिर लड़ना सीखा। लड़ लड़ कर बदलना सीखा। समाज ने हमें दिया सब कुछ। समाज को हम देंगे कुछ कुछ।
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